रंग पंचमी 2022, कब और क्यों मनाई जाती है रंग पंचमी जाने विस्तार से

रंग पंचमी का उत्सव चैत्र माह के कृष्ण पंचमी के दिन मनाया जाता है. इस पर्व के उपलक्ष पर देशभर में कई तरह के धार्मिक और रंगारंग कार्यक्रम संपन्न होते हैं. रंगपंचमी का पर्व बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है. अपने नाम के अनुरुप ये पर्व रंगों की महत्ता को दर्शाता है. इस दिन पर रंगों से लोग खेलते हैं. एक दूसरे पर रंग उड़ाते हैं. जीवन में हर रंग और सुंदरता के आगमन की कामना करते हैं. चैत्र मास में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि का ये पर्व बहुत से रहस्यों को अपने में समेटे हुए होता है. रंगों का और खुशी का पर्व है, रंगों का पर्व कहा जाने वाला यह समय पारंपरिक रूप से मनाया जाता है. लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर गीत गाये जाते हैं. घर-घर जा कर सभी एक दूसरे पर रंग लगाते हैं. रंगों के दिन लोग अपनी कटुता को भूल कर एक दूसरे के साथ प्रेम से मिलते हैं. आज के दिन मित्रता की जाती है. एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर चलता है.

होली के पांचवें दिन रंग पंचमी

रंग पंचमी पर्व का संबंध होली के साथ ही बहुत ही गहराई से जुड़ा हुआ है. होली की ही तरह रंगपंचगी के दिन भी एक दूसरे के साथ रंग खेला जाता है. होली के पांचवें दिन रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन लोग भगवान श्री कृष्ण और राधा जी का पूजन होता है. इस पूजन में भगवान के साथ रंग खेला जाता है. राधा कृष्ण जी को गुलाल और अबीर लगाया जाता है. होली की भांति रंगों से भरा यह त्यौहार मुख्य रुप से मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के क्षेत्रों में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. रंग पंचमी की धूम हर तरफ दिखाई देती है. इस पर्व के अवसर पर बहुत से पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें भोग स्वरुप भगवान को अर्पित किया जाता है. धूम धाम से मनाए जाने वाले इस उत्सव को सभी लोग मनाते हैं.

रंग पंचमी मुहूर्त

इस बार रंग पंचमी का त्यौहार 22 मार्च 2022 को मंगलवार के दिन मनाया जाएगा. रंग पंचमी को होली महोत्सव का समापन भी माना जाता है.
  • पंचमी तिथि प्रारंभ – 21 मार्च, 2022 सुबह 30:24 बजे से
  • पंचमी तिथि समाप्त – 22 मार्च, 2022 सुबह 28:21 बजे तक

भगवान के साथ खेली जाती है होली

रंग पंचमी का दिन भगवान को समर्पित होता है. इस दिन भक्त लोग भगवान के साथ रंग खेलते हैं. रंगों की होली का उत्सव विशेष रुप से मनाया जाता है. देवी देवताओं को समर्पित ये पर्व एक विशेष दिन होता है. इस दिन भगवान पर अबीर और गुलाल भेंट करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती हैं. इस दिन रंगों का उपयोग सभी प्रकार की नकारात्मकता को दूर करने के बहुत उपयोगी होता है. इस दिन हर तरफ का माहौल भक्तिमय होता है. रंगों में डूबा हुआ वातावरण और उड़ने वाले रंग को लेकर भी बहुत सी मान्यताओं से इसकी महत्ता स्पष्ट होती है. माना जाता है कि गुलाल, अबीर रंग व्यक्ति को भीतर से प्रसन्न कर देते हैं. इन रंगों द्वारा लोगों में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है. व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक के प्रवेश करते हैं.राग-रंग का यह पर्व संगीत और रंग का प्रमुख अंग है. प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे कलेवर के साथ चरम अवस्था पर होती है. इस दिन रंग उड़ाया जाता है. पारंपरिक गानों का प्रारंभ होता है. बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा हर तरफ छाई होती है. पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण होते हैं. ढोल-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में सभी लोग डूबे होते हैं. चारों तरफ़ रंगों की फुहार होती है. भगवान भी आसमान में रंगों के जरिए अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं.इस दिन व्रत रखने और पूजा पाठ करने से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. भगवान अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं. रंग पंचमी के दिन व्रत रखने से बड़े दोष मिटाए जा सकते हैं.

रंग पंचमी पौराणिक महत्व

रंग पंचमी का त्यौहार अपने में अनेकों कथाएं और पौराणिक मान्यताओं को अपने में समेटे हुए है. कुछ कथाओं के अनुसार रंग पंचमी का पर्व एक प्रकार की विजय का प्रतिक है. यह वो समय होता है जब जीवन नकारात्मक और तामसिक गुणों पर एक पवित्रता का प्रतिक बनता है. सतगुणों की प्रगती ही विजय का प्रतीक बनती है. रंग पंचमी का समय आध्यात्मिक साधना के मार्ग को आगे बढ़ाने में बहुत अधिक सहयोग करता है. इस समय पर रंग पंचमी पर्व का आयोजन विकास के मार्ग में आने वाली बाधाओं जल्द समाप्त हो जाएंगी. रंग पंचमी त्यौहार जीवन के प्रत्येक तत्व को प्रभावित करता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री विष्णु ने जो भी अवतार लिए हैं. उन अवतारों में प्रत्येक रंग की छता दिखाई देती है. भगवान द्वारा किया जाना धूलि वंदन सभी को रंगों में डूबों देने वाला होता है. धूलि वंदन से अर्थ है है कि त्रेता युग में श्री विष्णु जी ने अलग-अलग अवतार कार्य का आरंभ किया. देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली रंग पंचमी का पर्व लोक परंपराओं से जुड़ा होता है. वर्षों पुरानी परंपरा आज भी मौजूद है. इस दिन पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. लोग रंग पंचमी खेलते है. भगवान का पूजन करते हैं. रंग भरी यात्राओं का आयोजन होता है. इस यात्रा में बहुत से रंग उड़ाए जाते हैं. संपूर्ण मार्ग रंगों से भर जाता है. कुछ स्थानों पर होली दहन के बाद से धुलेंडी से रंग खेलने का सिलसिला शुरू होता है जो रंग पंचमी तक चलता है. इस दिन के साथ ही रंग पंचमी के साथ ही होली का अम्त होता है.

रंग पंचमी की पूजा विधि

रंग पंचमी के दिन भगवान श्री विष्णु और भगवान शिव का पूजन किया जाता है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कार्य किया जाता है. स्नान के पश्चात शुद्ध एवं साफ वस्त्रों को धारण किया जाता है. मंदिर में भगवान की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. इसके बाद घी अथवा तेल का दीपक जलाना चाहिए. धूप,गंध, सिंदूर, चंदन, अबीर इत्यादि भगवान को अर्पित करने चाहिए. यह सभी चीजें चढ़ाने के बाद विधिवत पूजा और अर्चना करनी चाहिए. इसके बाद भगवान को रंग लगाना चाहिए. और परिवार के साथ मिलकर कर इस पर्व को मनाना चाहिए.