प्रश्न कुण्डली में चोरी हुई वस्तु के मिलने के योग बने होते है. प्रश्न कुण्डली में खोया हुआ सामान मिलेगा या नहीं मिलेगा इसके कई योग होते हैं. यह योग निम्नलिखित है.   

* प्रश्न कुण्डली में लग्नेश सप्तम भाव में हो और सप्तमेश लग्न में हो तो चोरी हुई वस्तु वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में वृष, तुला या कुम्भ लग्न हो तो चोरी का सामान अवश्य मिलता है. 

* प्रश्न कुण्डली में तृतीय भाव में पाप ग्रह हों तथा पंचम भाव में शुभ ग्रह हों तो चोर स्वयं धन वापिस कर देता है. 

* प्रश्न कुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी ग्रह तथा चन्द्रमा, सूर्य के साथ स्थित होकर अस्त हों. 

* प्रश्न कुण्डली में अष्टमेश, अष्टम भाव में या सप्तम भाव में स्थित हो तो खोई वस्तु या चोरी हुई वस्तु मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्नेश तथा सप्तमेश का सप्तम भाव में इत्थशाल हो तो चोरी की वस्तु वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में शुभ ग्रहों का चन्द्रमा से इत्थशाल हो तथा चन्द्रमा प्रश्न लग्न या द्वितीय भाव में स्थित हो तो चोरी की वस्तु वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में  लग्नेश तथा दशमेश का इत्थशाल या मुथशिल योग हो तो चोरी की वस्तु वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में द्वितीयेश तथा अष्टमेश में मुत्थशिल योग हो तो चोरी हुई वस्तु वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में तृतीय भाव के स्वामी या नवमेश का सप्तमेश से इत्थशाल हो तो चोरी हुई वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा जिस राशि में होता है, उस राशि का स्वामी ग्रह चन्द्रमा को पूर्ण तथा मित्र दृष्टि से देखता हो. 

* प्रश्न कुण्डली में सूर्य तथा चन्द्रमा दोनों ही लग्न को देख रहें हों पूरा सामान ना मिलकर उसमें से कुछ सामान वापिस मिल जाता है. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्न और चन्द्रमा को शुभ ग्रह देख रहें हों चोरी की वस्तु वापिस मिल जाती है. 

* प्रश्न कुण्डली में द्वितीयेश तथा अष्टमेश का केन्द्र स्थान में इत्थशाल हो या ये दोनों ग्रह लग्नेश तथा दशमेश से दृष्ट हो अथवा युक्त हो. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्नेश के साथ चन्द्रमा का इत्थशाल हो तो चोरी हुए सामान में से कुछ सामान मिल जाता है. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्नेश तथा दशमेश, पाप ग्रहों से दृष्ट या युक्त हो तो चोरी का सामान मिल जाता है. 

* प्रश्न कुण्डली में बुध तथा चन्द्रमा, केन्द्र स्थान में एक-दूसरे को देख रहें हों तो चोरी की वस्तु वापिस मिल जाती है.       

* प्रश्न कुण्डली में लग्नेश तथा सप्तमेश लग्न, द्वित्तीय या एकादश भाव में हो तो चोरी का सामान वापिस मिल जाता है. 

* प्रश्न कुण्डली में द्वित्तीयेश तथा अष्टमेश पर चतुर्थेश की दृष्टि हो तो खोया सामान अथवा चोरी का सामान वापिस मिल जाता है. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्न में द्वित्तीय भाव का स्वामी ग्रह स्थित हो और उसका द्वित्तीय भाव में स्थित ग्रह से इत्थशाल योग हो रहा हो तो चोरी की वस्तु वापिस मिल सकती है. 

चोरी की वस्तु वापिस ना मिलने के योग | Yogas for not Getting The Stolen Thing 

* प्रश्न कुण्डली म���ं लग्नेश तथा लाभेश बलहीन हों तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्न में राहु स्थित हो तथा अष्टम भाव में सूर्य स्थित हो तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्न में मकर राशि हो तथा लग्न या द्वित्तीय भाव में शनि स्थित हो. 

* प्रश्न कुण्डली में केन्द्र, त्रिकोण भाव, द्वित्तीय तथा अष्टम भाव में पाप ग्रह हों या पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली में सप्तम या अष्टम भाव में मंगल हो तब चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* द्वित्तीय भाव का स्वामी सप्तम अथवा अष्टम भाव में स्थित हो तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली में लग्न भाव में सप्तमेश वक्री अवस्था में स्थित हो और लग्नेश सप्तम भाव में हो तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली के सप्तम भाव में पूर्णबली चन्द्रमा दोषरहित हो तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली के चतुर्थ भाव में पाप ग्रह हों तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली के सप्तम भाव में लग्नेश हो तो चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

* प्रश्न कुण्डली में सप्तमेश या चन्द्रमा सूर्य के साथ स्थित हों तो खोई वस्तु अथवा चोरी की वस्तु वापिस नहीं मिलती है. 

सभी प्रकार के प्रश्नों का आंकलन करने के लिए प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. प्रश्न कुण्डली को देखने के लिए आपको लग्न, चन्द्रमा, नवाँश लग्न तथा प्रश्न से संबंधित भाव अथवा कार्येश का विश्लेषण सावधानीपूर्वक करना चाहिए. कार्येश का अर्थ है कि जिस भाव से प्रश्न का संबंध होता है उस भाव के स्वामी को कार्येश कहा जाता है. कार्येश के बारे में आपको आरम्भ के अध्यायों में विस्तार से बताया गया है. 

यदि प्रश्न के समय लग्न, चन्द्रमा तथा संबंधित भाव बली होगें तो निश्चय ही अभीष्ट फल की प्राप्ति प्रश्नकर्त्ता को होती है. 

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