स्वाधिष्ठान, चक्र जननेन्द्रियों या अधिष्ठान त्रिकास्थि में स्थित होता है. स्वाधिष्ठान को द्वितीय चक्र स्वाधिष्टान, सकराल, यौन, द्वितीय चक्र नामों से भी संबोधित किया जाता है. यह मूलाधार के पश्चात द्वितीय स्थान पाता है जिस कारण इसे द्वितीय (दूसरा) चक्र कहा जाता है. इसके जाग्रत होने पर आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास, अहंकार इत्यादि दुर्गणों का नाश होता है.
सहज ज्ञान - स्वाधिष्ठान चक्र | Swadhi...
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All the Chakras present in our body are present in different organs. One of the chakra of them is Muladhar Chakra.
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