surya_grahan
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सूर्य ग्रहण का देशो पर प्रभाव
Surya Grahan's Effect on Countries

surya grahan सूर्य ग्रहण की अल्प आकृ्ति ही नजर आयेगी. भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा.


सूर्य ग्रहण की सीमा में आने वाले मुख्य देश (The states in the zones of Solar Eclipse)

2014 में लगने वाले सूर्य ग्रहण कंकण और खंडग्रास सूर्य ग्रहण होंगे. यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगे. यह ग्रहण मध्य प्रशांत महासागर, न्यूजी़लैंड, आस्ट्रेलिया और इण्डोनेशिया में दिखाई देंगे. इसके अतिरिक्त खंडग्रास ग्रहण मध्य साइबेरिया, कैनेडा, मैक्सिको, सुदूर पूर्व रूस में दिखाई देगा


वर्ष 2014 में सूर्य ग्रहण लगेगें, जो निम्न तिथियों में रहेगें.

  1. 29 अप्रैल 2014 को कंकण सूर्य ग्रहण.
  2. 23 अक्तुबर् 2014 को खण्डग्रास सूर्य ग्रहण.
  3. 20 मार्च 2015 को खग्रास सूर्य ग्रहण लगेगा.


ग्रहण का सूतक अर्थात अशुद्ध समय (The Sutak time for Surya Grahan)

सूतक काल में बालकों, वृ्द्ध, रोगी व गर्भवती स्त्रियों को छोडकर अन्य लोगों को सूतक से पूर्व भोजनादि ग्रहण कर लेना चाहिए. तथा सूतक समय से पहले ही दूध, दही, आचार, चटनी, मुरब्बा में कुशा रख देना श्रेयस्कर होता है. ऎसा करने से ग्रहण के प्रभाव से ये अशुद्ध नहीं होते है.परन्तु सूखे खाने के पदार्थों में कुशा डालने की आवश्यक्ता नहीं होती है.


ग्रहण अवधि में किये जाने वाले कार्य (Things to do during the Grahan)

ग्रहण के स्पर्श के समय में स्नान, ग्रहण मध्य समय में होम और देव पूजन और ग्रहण मोक्ष समय में श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और सर्व मुक्त होने पर स्नान करना चाहिए.


तीर्थ स्थलों में जल स्नान का महत्व (Importance of Dips in holy places during the Eclipse)

स्नान के लिये प्रयोग किये जाने वाले जलों में समुद्र का जल स्नान के लिये सबसे श्रेष्ठ कहा गया है. ग्रहण में समुद्र नदी के जल या तीर्थों की नदी में स्नान करने से पुन्य फल की प्राप्ति होती है. किसी कारण वश अगर नदी का जल स्नान करने के लिये न मिल पाये तो तालाब का जल प्रयोग किया जा सकता है.वह भी न मिले तो झरने क जल लेना चाहिए. इसके जल श्रेष्ठता में इसके बाद भूमि में स्थित जल को स्नान के लिये लिया जा सकता है.


ग्रहण में ध्यान देने योग्य अन्य बातें (Important things to remember during surya grahan)

ग्रहण के समय धारण किये हुए वस्त्र आदि को ग्रहण के पश्चात धोकर व शुद्ध करके ही धारण करने का विचार है.



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