सूर्य षष्ठी | Surya Shasti | Surya Shasti Vrat

सूर्य षष्ठी का त्यौहार कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्यौहार है. इसे डाला छठ भी कहते हैं. सूर्योपासना का यह पर्व संपूर्ण भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता रहा है. कार्तिक माह में आने वाली षष्ठी को सूर्य षष्ठी के व्रत रूप में मानाते हैं. सूर्य षष्ठी में सूर्य की पूजा की जाती है. भगवान सूर्य की आराधना करते हुए लोग गंगा-यमुना या किसी भी पवित्र नदी या पोखर के किनारे सूर्य षष्ठी पूजा को करते हैं. इस वर्ष यह पर्व 19 नवंबर 2012 दिन सोमवार को मनाया जाएगा.

सूर्य षष्ठी पौराणिक संदर्भ | Surya Shasti Mythology

कार्तिक माह की शुक्ल षष्ठी को यह व्रत किया जाता है. इस व्रत के विषय में एक कथा प्रचलित है इसके अनुसार प्राचीन समय में बिंदुसार नामक तीर्थ में महिपाल नाम का एक वैश्य रहा करता था. वह वैश्य धर्म कर्म इत्यादि में विश्वास नहीं करता था, भगवान को नहीं मानता था. एक बार वह सेठ सूर्य देव की प्रतिमा के सामने ही मल मूत्र त्याग करने लगता है. उसके इस घृणित कृत से भगवान सूर्य देव उससे क्रोधित हो जाते हैं और उसे नेत्रहीन होने का शाप मिलता है जिसके परिणाम स्वरूप उसकी आँखों की रोशनी कम होने लगती है और कुछ समय बाद वह पूर्ण रूप से नेत्रहीन हो जाता है.

अपनी दुर्दशा से दुखी हो उस व्यक्ति ने जान देने की सोची और गंगा में कूदने का निश्चय कर नदी कि ओर चल पडा़. मार्ग में उसे नारद जी मिलते हैं वह उस वैश्य को रोक कर उसका हाल चाल पूछने लगते हैं. नेत्रहीन सेठ अपनी व्यथा को बताते हुए रोने लगता है, वह  नारद जी से कहता है कि वह सांसारिक सुख-दुख से परेशान हो आत्महत्या करने जा रहा है.

सेठ की करूणा भरे वचन सुनकर नारद जी उसे कहते हैं कि हे अज्ञानी सेठ तेरी यह दुर्दशा भगवान सूर्य के क्रोध के कारण हुई है तूने जो अनुचित कृत किया उसी का फल भोग रहा है तू, अत: यदि तुझे इन सभी कष्टों से मुक्त होना है तो तू कार्तिक मास की षष्ठी को व्रत कर और भगवान सूर्य की पूजा अर्चना करके उनसे अपने पापों की क्षमा याचना कर तभी तेरा यह कष्ट दूर हो सकेगा.

तब वह वाणिक नारद जी के कथन अनुसार सूर्य षष्ठी का व्रत करता है तथा अपने पापों की क्षमा मांगता है सूर्य भगवान उससे प्रसन्न हो उसे पुन: नेत्र ज्योति प्रदान करते हैं. इस प्रकार यह सूर्य षष्ठी व्रत सभी सुखों को प्रदान करने वाला व्रत है.

सूर्य षष्ठी व्रत पूजा | Surya Shasti Vrat Puja

सूर्य षष्ठी व्रत भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है. इस पर्व का आयोजन कार्तिक माह के आरंभ के साथ ही शुरू हो जाता है इस पर्व के उपलक्ष में भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व होता है. सूर्य षष्ठी व्रत में भगवान सूर्य की पूजा उपासना की जाती है इस दिन व्रती अपने सभी कार्यों को पूर्ण कर भगवान आदित्य का पूजन करता है. उन्हें जल द्वरा अर्घ्य दिया जाता है. पूजा की विधी में फल, विभिन्न प्रकार के पकवान एवं मिष्ठान को शामिल किया जाता है इस दिन सूर्य की किरणों को अवश्य ग्रहण करना चाहिए. पूजन तथा अर्घ्य देने के समय सूर्य की किरणें अवश्य देखनी चाहिए.

सूर्य षष्ठी व्रत महत्व | Importance of Surya Shasti Vrat

सूर्य षष्ठी पर्व के अवसर पर परिवार के सभी सदस्य स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हैं. सूर्य षष्ठी पर्व के दिन पूजा का सामान तैयार किया जाता है जिसमें सभी प्रकार के फल, केले की पूरी गौर, नारियल, मूली, सुथनी, अखरोट, बादाम इत्यादि को रखा जाता है. इस व्रत का बहुत महत्व रहा है इसे करने से घर में धन धान्य की वृद्धि होती है. तथा परिवार में सुख समृद्धि का आगमन होता है. इस व्रत को करने से चर्म तथा नेत्र रोगों से मुक्ति मिलती है.

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