सूर्य देव नव ग्रहों में प्रमुख स्थान रखते हैं. यह सभी के नायक रूप में सौर देवता हैं. बारह आदित्यों में से एक अर्थात सूर्य देव अदिति के बारह पुत्रों (आदित्यों) में एक हैं, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक पत्नि अदिति के पुत्र हैं. धर्म ग्रंथों में सूर्य देव को विश्व के प्राण कहा गया है . इन्हीं के द्वारा संपूर्ण ब्रह्माण प्रकाशमान है इन्हीं से शक्ति पाकर पृथ्वी में जीवन का संचार संभव हो पाया है. वेदों ने सूर्य की महिमा का गुणगान किया है. ऋग्वेद तथा यजुर्वेद ने "चक्षो सूर्यो जायत" कह कर सूर्य को भगवान का नेत्र माना है.
सूर्य जन्म कथा | Birth Story of Sun
पौराणिक आख्यानों में भगवान सूर्य के बारे में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है. सूर्य देव की उत्पत्ति के विषय में एक कथा प्रचलित है जिसमें इन्हें महर्षि कश्यप और अदिति का पुत्र कहा गया है अदिति के पुत्र होने के कारण ही इन्हें आदित्य भी कहा जाता है. कथा इस प्रकार है एक समय दैत्यों का प्रभुत्व खूब बढ़ने लगत है. दैत्य की शक्ति के आगे देवता परास्त हो जाते हैं और स्वर्ग पर राक्षसों का साम्राज्य स्थापित हो जाता है. इस विपत्ति में सभी निराशभाव से भटकने लगते हैं. देवों के यह दुर्दशा देखकर देव-माता अदिति भगवान सूर्य की उपासना करती हैं. आदिति की तपस्या से प्रसन्न हो भगवान सूर्य उन्हें दर्शन देते हैं और उन्हें वरदान देते हैं कि वह उनकी इच्छा को पूर्ण करने के लिए अपने हज़ारवें अंश से उनके पुत्र रूप में जन्म लेंगे तथा उनके देव पुत्रों की रक्षा करेंगे,.
इस प्रकार भगवान के कथन अनुसार कुछ समय के उपरान्त देवी अदिति गर्भवती होती हैं.संतान की मंगल-कामना के लिए देवी अदिति अनेक प्रकार के व्रत व पूजा पाठ करती हैं. उनके इस कार्य को देखकर महर्षि कश्यप चिंतित हो जाते हैं तथा उनसे कहते हैं कि हे अदिति तुम गर्भवती हो, तुम्हें अपना ध्यान रखना चाहिए किंतु परन्तु तुम व्रत-उपवास के द्वारा अपने शरीर को कष्ट दे रही हो तुम्हारे ऎसा करने से तुम्हारा गर्भ नष्ट हो सकता है. स्वामी की बात को सुन अदिति उनसे कहती हैं कि स्वामी आप चिन्ता न करें. मेरा गर्भ दिव्य सूर्य शक्ति का तेज है यह सदा अविनाशी है और उसे कुछ नहीम होगा.
निशचित समय तथा शुभ घडी़ में देवी अदिति के गर्भ से भगवान सूर्य का जन्म होता है. वह देवताओं के नायक बनते हैं और असुरों को परास्त कर देवों का प्रभुत्व कायम करते हैं. भगवान सूर्य के विषय में सूर्योपनिषद, भविष्य पुराण, मत्स्य पुराण, ब्रह्म पुराण, मार्कण्डेय पुराण तथा साम्बपुराण इत्यादि ग्रंथ वर्णित हैं.
सूर्य ग्रह के लिये दान | Donations For The Sun
सूर्य ग्रह के दुष्प्रभाव से मुक्त होने के लिये अनेक वस्तुओं को दान में दिया जाता है जैसे गेंहूं, लाल और पीले रंग के वस्त्र , लाल मिठाई, स्वर्ण, गुड और तांबा धातु इत्यादि वस्तुएं दान में दि जा सकती हैं.
सूर्य ग्रह के रत्न उपरत्न | Gemstones of The Planet Sun
सूर्य ग्रह के रत्नों मे माणिक और उपरत्नो में लालडी, तामडा हैं.
सूर्य का स्वरूप | The Form of Sun
सूर्य भगवान के केश एवं हस्त स्वर्ण के हैं. उनके रथ को सात घोड़े खींचते हैं, जो सात चक्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह रवि रूप में "रविवार" के स्वामी हैं. सूर्य राज्य सुख, सत्ता, ऐश्वर्य ,वैभव जैसे गुण प्रदान करता है. सूर्य सौरमंडल का प्रथम ग्रह है, यही सम्पूर्ण सौर जगत का आधार स्तम्भ है इन्हीं से शक्ति प्राप्त करके ग्रह,उपग्रह,नक्षत्र आदि इनके चारों ओर विचरण करते हैं. सूर्य सिंह राशि का स्वामी है. ज्योतिष में सूर्य देव को मस्तिष्क का अधिपति कहा गया है. सूर्य की दो पत्नियाँ संज्ञा और छाया हैं.
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