शनि ग्रह | The Saturn I Saturn Birth Story | Shani Dev

शनि हिन्दू ज्योतिष में नौ मुख्य ग्रहों में से एक हैं. शनि शनिवार के स्वामी हैं. शनि अन्य ग्रहों की तुलना मे धीमे चलते हैं इसलिए इन्हें शनैश्च भी कहा जाता है. शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के एक पुत्र हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि के जन्म के पश्चात जब शनि ने सूर्य को देखा तो सूर्य को कोढ़ हो जाता है या कहें कि सूरज ग्रहण में चले गए थे अत: शनि का अपने पिता सूर्य से वैर माना गया है और ज्योतिष पर शनि के प्रभाव का साफ़ संकेत मिलता है. शनि ग्रह वायु तत्व और पश्चिम दिशा के स्वामी हैं. बुध और शुक्र इनके मित्र ग्रह हैं. तुला राशि में यह उच्च तथा मेष राशि में नीच के होते हैं.

शनि का स्वरूप | The Form of Saturn

शनि देव को काला या कृष्ण वर्ण का बताया जाता है इन्हें काला रंग अधिक प्रिय है. शनि देव काले वस्त्रों में सिर पर स्वर्ण मुकुट गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्रों से सुशोभित हैं. एक हाथ में  तलवार, तीर और दो खंजर लिए हुए लोहे के रथ को खिंचते गिद्ध पर सवार होते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन हुआ है. जन्म के समय से ही शनि देव श्याम वर्ण, लंबे शरीर, बड़ी आंखों वाले और बड़े केशों वाले थे. यह न्याय के देवता हैं,  योगी, तपस्या में लीन और हमेशा दूसरों की सहायता करने वाले होते हैं शनि ग्रह को न्याय का देवता कहा जाता है यह जीवों सभी कर्मों का फल प्रदान करते हैं. इन्हें भृत्य भी कहा गया है. शनि देव महापराक्रमी  न्यायाधीश हैं इनके प्रभाव से कोई अछूता नहीं रहता यह किसी के साथ अन्याय नहीं करते. स्वभाव से उग्र और हठी  हैं अपने पिता सूर्य से इनके संबंध कभी भी ठीक नहीं रहे.

शनि जन्म कथा | Birth Story of Saturn

सूर्य का रूप परम तेजस्वी है इन्हीं से सभी प्रकाशमान हैं. सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ कुछ समय पश्चात उन्हें तीन संतानो के रूप में मनु, यम और यमुना की प्राप्ति हुई. इस प्रकार कुछ समय तो संज्ञा ने सूर्य के साथ निर्वाह किया परंतु संज्ञा सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाईं उनके लिए सूर्य का तेज सहन कर पाना मुश्किल होता जा रहा था . इसी वजह से संज्ञा ने अपनी छाया को पति सूर्य की सेवा में छोड़ कर वहां से चली चली गईं. कुछ समय बाद छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ. 

शनि के रत्न और उपरत्न | Gemstones of the Planet Saturn

शनि के रत्न और उपरत्नों में नीलम,नीली ,नीलमणि, जामुनिया, नीला कटेला इत्यादि आते हैं.

शनि सम्बन्धी दान पुण्य | Donations for the Saturn

शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में व्यक्ति को अपने वजन के बराबर काले चनों को दान में देना चाहिए इसके अतिरिक्त काले कपडे, जामुन, काली उडद, काले जूते, तिल, लोहा, तेल, नीलम ,कुलथी,काले फ़ूल,कस्तूरी सोना आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं.

शनि शांति उपाय | Remidies for Saturn

शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल , उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए, शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए.

शनि कि साढेसाती पर रिपोर्ट पाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :शनि की साढे़साती


Add comment

biuquote
  • Comment
  • Preview
Loading