राहु नव ग्रहों में से एक ग्रह हैं, राहु अंधकार रूपी रथ में सवार होते हैं, इनके रथ को काले रंग के आठ घोड़े खींचते हैं. राहु के अधिदेवता काल तथा प्रत्यधि देवता सूर्य हैं. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु की महादशा 18 वर्ष की मानी गई है. राहु को अशुभ ग्रह माना गया है. इसे छाया ग्रह कहा जाता है, राहु के सम्बन्ध में अनेक पौराणिक आख्यान है,राहु काल में कोई भी कार्य करना वर्जित माना जाता है. अत: किसी कार्य को शुरू करने से पहले राहु काल का विचार किया जाता है.
राहु जन्म कथा | Rahu Story
राहु के विषय में कहा जाता है कि इनकी माता का नाम सिंहिका था और इनके पिता विप्रचित्ति थे. राहु के सौ भाई थे, जिन सभी में राहु अधिक प्रतिभावान थे. सिंहिका हिरण्यकशिपु की पुत्री थी. माता के नाम से राहु को सैंहिकेय भी कहा गया है. राहु ग्रह रूप में ब्रह्मा जी की सभा में विराजते हैं.
राहु कथा | Rahu Story
एक समय समुद्रमंथन के दौरान जब दैत्यों और देवों को अमृत की प्राप्ति हुई तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप में अमृत को प्राप्त किया और अमृत देवताओं को पिलाने लगे. तभी उस समय राहु देवताओं का वेष बनाकर उनके मध्य में बैठ जाते हैं. परंतु सूर्य और चंद्रमा उन्हें पहचान लेते हैं और उनकी सच्चाई बता देते हैं. किंतु तब तक राहु अमृत को पी चुका होता है. भगवान अपने तीक्ष्ण धारवाले सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट देते हैं. इस प्रकार चक्र से कटने पर भी उनकी मृत्यु नही होती तथा उनका कटा सिर राहु कहलाया और धड़ केतु के नाम से प्रसिद्ध हुआ और अमृत का संसर्ग होने से वह अमर हो जाते हैं. बैर होने के कारण राहु सूर्य और चंद्रमा को अपने अंधकार से भर देता है ग्रह रूप में राहु चंद्रमा और सूर्य पर ग्रहण लगाता है.
राहु का स्वरूप | Rahu’s Appearance
राहु का भयंकर रूप वाले सिर पर मुकुट, गले में माला तथा शरीर पर काले रंग के वस्त्रों को धारण किए रहते हैं. यह सिंह के आसन पर विराजमान हाथों में तलवार, ढाल, त्रिशूल और वरमुद्रा लिए होते हैं. राहु और केतु का शरीर एक है और ज्योतिष अनुसार राहु केतु छायाग्रह हैं.
शान्ति के उपाय | Rahu’s Remedies
राहु की शांति के लिये मृत्युंजय, जप तथा फिरोजा धारण करना उत्तम होता है. राहु की पीड़ा से बचने के लिए उड़द दाल, तिल तथा सरसों का प्रयोग करना उत्तम होता है.
केतु ग्रह | Ketu Planet
अमृत मंथन के समय भगवान विष्णु के सुद्रशन चक्र से कटने पर सिर राहु कहलाया और धड़ केतु कहलाया.
केतु धुम्र वर्ण के विकृत मुँह वाले हैं यह काले वस्त्र धारण करते हैं. इनके एक हाथ में गदा और दूसरे में वरमुद्रा धारण किये रहते हैं. केतु की महादशा सात वर्ष की होती है केतु के अधिदेवता चित्रकेतु तथा प्रत्यधिदेवता ब्रह्मा हैं.
केतु के लिए दान | Donations for Ketu
केतु की प्रसन्नता हेतु दान की जानेवाली वस्तुओं में रत्न, तेल, काले तिल, कम्बल, शस्त्र, कस्तूरी इत्यादि आती हैं. केतु की शांति हेतु लहसुनिया रत्न धारण कर सकते हैं. महामृत्यंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं.
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