बुध ग्रह चन्द्र और तारा के पुत्र हैं. यह रजो गुण वाले हैं और वाणी का प्रतिनिधित्व करते हैं. बुध शांत एवं सौम्य प्रवृत्ति के ग्रह हैं. बुध ग्रह के अधिदेवता एवं प्रत्यधिदेवता भगवान विष्णु हैं यह मिथुन तथा कन्या राशि के स्वामी हैं. बुध की महादशा 17 वर्ष की होती है.
बुध के जन्म की कहानी | The Mercury Birth Story
एक समय देवताओं के गुरू बृहस्पति जी स्त्री का रूप धारण करने की इच्छा लिए ब्रह्मा जी के पास जाते हैं और उनसे जिद्द करते हैं कि वह उन्हें स्त्री का रूप प्रदान करें उनके हठ के समक्ष ब्रह्मा जी उन्हें स्त्री का रूप दे देते हैं. ब्रहस्पति स्त्री के रूप में विचरण कर रहे होते हैं तभी उनपर चंद्रमा की दृष्टि पड़ती है और चंद्रमा स्त्री रूपी गुरू का शील भंग कर देते हैं. इस घटना से व्यथित गुरू ब्रह्मा जी के समक्ष जाते हैं. परंतु ब्रह्मा जी उनसे कहते हैं कि अब उन्हें नौ माह तक स्त्री के ही रूप में रहना पड़ेगा.
इस प्रकार समय व्यतीत होता है और नौ महीने पश्चात बुध का जन्म होता है. बालक के जन्म के उपरांत बृहस्पति स्त्री रूप का त्याग कर देते हैं. ऐसे में प्रकृति बुध को अपनाती है. बुध के साथ राहु और शनि जैसे मित्र जुड गए लेकिन बाद में बुध, शुक्र से ज्ञान पाकर सूर्य की शरण में जाते हैं.
बुध के जन्म के विषय में एक अन्य पौराणिक कथा प्रचलित रही है जिसके अनुसार चंद्रमा देवताओं के गुरु बृहस्पति के शिष्य थे. विद्या अध्ययन की समाप्ति पर जब चंद्रमा ने गुरु को दक्षिणा देने चाही तो बृहस्पति उनसे कहते हैं कि इस दक्षिणा को वह उनकी पत्नी तारा को दें.
इस पर चन्द्रम गुरु पत्नी को दक्षिणा देने जाते हैं किंतु गुरु पत्नी तारा का सौंदर्य देख उनपर मोहित हो जाते हैं और उसे जबरन अपने साथ ले जाने लगते हैं. तारा चंद्र को समझाने का प्रयास करती हैं किंतु वह नहीं मानते.
तथा अपना दुराग्रह नही छोडते इस पर गुरू बृहस्पति और देवता सभी उन्हें समझाने का प्रयास करते हैं परंतु चंद्रमा के न मानने पर उनके मध्य युद्ध होता है इस युद्ध में गुरू की हार होती है.
जब भगवान शिव को चन्द्रमा के इस नीच कृत का पता चलता है तो वह क्रोधित हो उसे दंड देने के लिये चल पड़ते हैं चन्द्रमा दैत्यों असुरों, शनि और मंगल के सहयोग से भगवान शिव से युद्ध करते हैं इस युद्ध से चारों ओर विध्वंस मच जाता है. तब भगवान ब्रह्मा जी के हस्तक्षेप से चन्द्रमा गुरु पत्नी तारा को लौटा देते हैं.
एक वर्ष पश्चात तारा एक तेजस्वी पुत्र को जन्म देती हैं. उस बालक के पिता चन्द्रमा होते हैं. चन्द्रमा ने उस पुत्र को ग्रहण किया और उसका नाम बुध हुआ.
बुध ग्रह के लिये दान | Donations For The Mercury
बुध के लिए दान की जाने वाली वस्तुओं में मूँगा, पन्ना, स्वर्ण, कपूर, मूंग दाल, चीनी तथा घी का दान करना चाहिये.
बुध ग्रह के रत्न उपरत्न | Gemstones of The Planet Mercury
बुध ग्रह के रत्नों में पन्ना और सुलेमानी होते हैं.
बुध की शांति के उपाय | Remedies for Mercury
बुध ग्रह की शांति के लिये अमावस्या का व्रत करें. पन्ना रत्न को धारण करना चाहिये.बुध को इलायची तथा चंपा की सुगंध प्रिय होती है. चंपा का इत्र और तेल का प्रयोग बुध की दृष्टि से उत्तम है.
बुध का स्वरूप | The Form of Mercury
बुध भगवान पीला वस्त्र धारण किए सिर पर सोने का मुकुट तथा गले में सुन्दर पुष्प माला पहने हुए कांति युक्त दिखाई देते हैं. हाथों में तलवार, ढाल, गदा और वरमुद्रा धारण किये हैं. बुध देव का वाहन सिंह है यह श्वेत रथ और प्रकाश से दीप्त हैं. नवग्रह में इनकी पूजा ईशानकोण में की जाती है इनका प्रतीक वाण है तथा रंग हरा है.
शनि कि साढेसाती पर रिपोर्ट पाने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:शनि की साढे़साती