आश्विन माह की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. इसी दिन से कार्तिक माह का स्नान आरम्भ माना जाता है. यह स्नान कार्तिक माह की पूर्णिमा पर समाप्त होता है. इस वर्ष यह पवित्र स्नान 11 अक्तूबर से आरम्भ होगा और 10 नवम्बर तक चलेगा. इस पूरे माह में सुबह-सवेरे पवित्र नदियों पर स्नान करने का महत्व है. पुराणों के अनुसार इस माह का प्रत्येक दिन पर्व के समान है. इस माह में स्नान - दान तथा व्रत से पुण्य कर्मों के फलों में वृद्धि होती है. इस माह में दीपदान का अपना विशेष महत्व है.
कार्तिक माह में इल्ली तथा घुण की कहानी | Katik Month- Story of a Worm and a Insect
बहुत समय पहले एक इल्ली थी और एक घुण था. कार्तिक माह का आरम्भ होने पर इल्ली ने घुण से कहा कि चलो आओ कार्तिक नहा लें. तब घुण ने कहा कि तू ही नहा लें. मेरे तो मोठ तथा बाजरा पडे़ हैं. मैं नहीं नहाउंगा. मैं तो हरे-हरे बाजरे का सीटा खाउंगा और ठण्डा-ठण्डा पानी पीऊंगा. यह सुनकर इल्ली राजा की लड़की के पल्ले से चिपकर चली गई. लेकिन घुण वहीं पडा़ रहा. वह नहीं नहाया. कार्तिक खतम होने के बाद दोनों मर गए. मरने के बाद इल्ली ने कार्तिक स्नान के कारण राजा के घर जन्म लिया. लेकिन घुण ने कार्तिक स्नान नहीं किया था इसलिए वह राजा के घर गधा बनकर रहने लगा.
बडे़ होने पर राजा की लड़की बनी इल्ली का विवाह तय हुआ और विवाह के बाद वह ससुराल जाने लगी तो उसकी बैलगाडी़ रुक गई. राजा-रानी ने कहा कि बैलगाडी़ क्यूं रुक गई! तुझे जो मांगना है, वह मांग ले. तब लड़की ने कहा कि यह गधा मुझे दे दो. राजा-रानी हैरान हुए. वह बोले कि यह तुम क्या माँग रही हो. तुम चाहो तो धन-दौलत ले जाओ. यह गधा कोई ले जाने की चीज है. लेकिन लड़की नहीं मानी. हारकर राजा-रानी ने वह गधा रथ के साथ बाँध दिया. गधा फुदक-फुदक कर चलने लगा. अपने ससुराल के महल में पहुंचने पर लड़की वह गधा महल की सीढी़ के नीचे बाँध दिया.
एक दिन जब वह सीढी़ उतर रही थी तब वह गधा बोला कि ऎ सुन्दरी, थोडा़ पानी पिला दे. तब वह बोली आ अब पहले तू नहा ले. पहले जन्म में तूने कहा था कि मैं पहले बाजरा खाऊंगा और ठण्डा-ठण्डा जल पीऊंगा. उन दोनों के आपस की यह बात देवरानी तथा जेठानी सुन लेती हैं. दोनों जाकर लड़की के पति को सिखाती हैं कि तुम्हारी पत्नी जादूगरनी है. वह जानवरों से बात करती है. तब उसके पति ने जवाब दिया - मैं आपकी बातें तभी मानूंगा जब मैं स्वयं अपने कानों से यह सब सुन लूंगा और अपनी आंखों से देख लूंगा.
अगले दिन राजकुमार छिपकर बैठ जाता है. उस दिन भी लड़की बनी इल्ली तथा गधा बना घुण वही बात करते हैं तो उसका पति तलवार निकालकर खडा़ हो जाता है और कहता है कि तुम जानवर से बात कर रही हो! तुम मुझे सच बताओ, क्या बात है? अन्यथा मैं तलवार से तुम्हें मार दूंगा. उसकी पत्नी उससे विनती करती है कि तुम औरत का भेद मत खोलो. लेकिन वह नहीं मानता. हारकर लड़की को सारी बात बतानी पड़ती है. वह कहती है कि पिछले जन्म में मैं इल्ली थी और यह गधा घुण था. मैने इसे कार्तिक नहाने के लिए बहुत कहा लेकिन यह नहीं माना. राजा की लड़की के पल्ले से लगकर नहाने से मैंने राजा की लड़की के रुप में जन्म लिया और यह घुण नहीं नहाया तो यह गधा बन गया. इसलिए मैं इससे पिछली बात कर रही थी.
अपनी पत्नी की बात सुनकर वह बहुत हैरान हुआ और कहने लगा कि कार्तिक स्नान से इतना पुण्य मिलता है? तब उसकी पत्नी बोली कि मेरे कार्तिक स्नान के कारण ही तो मैं राजा के घर जन्मी हूँ और मेरा विवाह एक राजकुमार से हुआ है. मुझे सभी तरह का राजपाट मिला है. यह सुनकर पति बोला कि यदि कार्तिक स्नान का इतना अधिक महत्व है तब हम दोनों जोडे़ में यह स्नान करेंगें और जितना हो सकेगा उतना दान-पुण्य भी करेगें. इससे हमें भविष्य में भी शुभ फलों की प्राप्ति हो. उसके बाद दोनों पति-प्त्नी जोडे़ से कार्तिक स्नान करने लगे और उनके पास पहले से भी अधिक धन-सम्पदा एकत्रित हो जाती है.
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