
कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली का पर्व हर वर्ष मनाया जाता है. इस वर्ष दीवाली का यह त्यौहार 13 नवम्बर 2012, दिन मंगलवार को मनाया जाएगा. भारतवर्ष में हिन्दुओं का यह प्रमुख त्यौहार है. इस दिन हर घर रोशनी से सजा होता है. प्राचीन समय में दिवाली को वैश्यों का प्रमुख त्यौहार माना जाता था. इस दिन से वह व्यापार संबंधी नए बहीखाते आरम्भ करते हैं. बिना धन के व्यापार का कोई अर्थ नहीं होता है. इसलिए व्यापारी वर्ग इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा आराधना करते हैं.
इस दिन सभी लोग सुबह से ही घर को सजने का कार्य आरम्भ कर देते हैं. संध्या समय में दीये जलाते हैं. लक्ष्मी तथा गणेश पूजन करते हैं. आस-पडौ़स में एक-दूसरे को मिठाइयों का आदान-प्रदान किया जाता है. रिश्तेदारों तथा मित्रों को मिठाइयों का आदान-प्रदान कई दिन पहले से ही आरम्भ हो जाता है. रात में बच्चे तथा बडे़ मिलकर पटाखे तथा आतिशबाजी जलाते हैं.
धन तेरस । धन त्रयोदशी | Dhanteras | Dhantrayodashi
दिवाली का त्यौहार पांच दिन तक मनाया जाता है. इस त्यौहार की तैयारी कई दिन पहले ही आरम्भ हो जाती है. घर की लिपाई-पुताई होती है. रंग-रोगन होता है. घर की पूरी सफाई की जाती है. दिवाली से दो दिन पहले धन-तेरस अथवा धन त्रयोदशी का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा है. इस दिन स्वर्ण अथवा रजत आभूषण खरीदने का भी रिवाज है. अपनी - अपनी परम्परानुसार लोग सामान खरीदते है. संध्या समय में घर के मुख्य द्वार पर एक बडा़ दीया जलाया जाता है.
छोटी दिवाली । नरक चतुर्दशी | Choti Diwali | Narak Chaturthi
बडी़ दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन को नरक चतुर्दशी अथवा नरका चौदस भी कहते हैं. इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था. इसलिए इसे नरका चौदस कहा जाता है. इस दिन संध्या समय में पूजा की जाती है और अपनी - अपनी परंपरा के अनुसार दीये जलाए जाते हैं.
बडी़ दिवाली | Badi Diwali
पांच दिन के इस पर्व का यह मुख्य दिन होता है. इस दिन सुबह से ही घरों में चहल-पहल आरम्भ हो जाती है. एक-दूसरे को बधाई संदेश दिए जाते हैं. घर को सजाने का काम आरम्भ हो जाता है. संध्या समय में गणेश जी तथा लक्ष्मी जी का पूजन पूरे विधि-विधान से किया जाता है. पूजन विधि में धूप-दीप, खील-बताशे, रोली-मौली, पुष्प आदि का उपयोग किया जाता है. पूजन के बाद मिठाई खाने का रिवाज है. बच्चे और बडे़ मिलकर खूब आतिशबाजी चलाते हैं. बम-पटाखे फोड़ते हैं.
अन्नकूट । गोवर्धन पूजा । विश्वकर्मा दिवस | Annakut | Govardhan Puja | Vishwakarma Divas
दिवाली से अगले दिन अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है. इस दिन मंदिरों में सभी सब्जियों को मिलाकर एक सब्जी बनाते हैं, जिसे अन्नकूट कहा जाता है. मंदिरों में इस अन्नकूट को खाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी होती है. अन्नकूट के साथ पूरी बनाई जाती है. कहीं-कहीं साथ में कढी़-चावल भी बनाए जाते हैं.
इसी दिन रात्रि समय में गोवर्धन पूजा भी की जाती है. गोवर्धन पूजा में गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है और उसे भोग लगाया जाता है. उसके बाद धूप-दीप से पूजन किया जाता है. फिर घर के सभी सदस्य इस गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं.
इसी दिन विश्वकर्मा दिवस भी मनाया जाता है. इस दिन मजदूर वर्ग अपने औजारों की पूजा करते हैं. फैक्टरी तथा सभी कारखाने इस दिन बन्द रहते हैं.
भैया दूज | Bhai Dooj
दिवाली का पर्व भैया दूज या यम द्वित्तीया के दिन समाप्त होता है. यह त्यौहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वित्तीया को मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक करती हैं और मिठाई खिलाती हैं. भाई बदले में बहन को उपहार देते हैं.
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