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    <link>http://astrobix.com</link>
    <pubDate>2010-11-04T11:27:38.49Z</pubDate>
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    <language>en-us</language>
    <title>Latest articles on Vedic Astrology [Astrobix.com]</title>
    <description>Latest articles on Vedic Astrology from astrobix.com</description>
    <item>
      <title>Diwali Puja in Hindi - दिवाली पूजा विधि </title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/584-diwali-puja-in-hindi.aspx</link>
      <description>दिवाली का पूजन कैसे किया जाता है? दिवाली की पूजा के लिए क्या सामग्री लेनी चाहिए, 2010 में दिवाली की पूजा का मुहूर्त कब है? Read Diwali Puja Vidhi in Hindi</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>मीन लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Pisces Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/582-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a2%e0%a5%87-%e0%a4%b8.aspx</link>
      <description>इस कार्य में राशि के स्वामी ग्रह की स्थिति, युति, व दृष्टि सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इस ग्रह से संबध बनाने वाले अन्य ग्रहों के प्रभाव से भी ग्रह फल प्रभावित होते है. ग्रह शुभ हों, या अशुभ जब भी उसे कोई शुभ ग्रह देखता है. उसकी शुभता में वृ्द्धि होती है. पर अशुभ ग्रह का दृष्टि प्रभाव होने पर ग्रह की अशुभता में ही बढोतरी होती है. कुण्डली के सभी भाव अपना- अपना महत्व रखते है. इन भावों में स्थित राशियों के महत्व को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है. </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>कुम्भ लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Aquarius Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/581-saturn-sadesati-for-aquarius-ascendant.aspx</link>
      <description>लग्न भाव में लग्नेश हो, तो लग्न भाव को बल प्राप्त होता है. इसी प्रकार लग्नेश का त्रिक भावों में स्थित होना व्यक्ति के स्वास्थ्य में कमी का कारण बन सकता है. शनि को आयु का कारक ग्रह कहा गया है. इस भाव से शनि का संबन्ध बनने पर व्यक्ति की आयु में वृ्द्धि की संभावनाएं रहती है. इसी प्रकार धन भावों से गुरु का संबध व्यक्ति के धन में बढोतरी करता है. आईय़े कुम्भ लग्न में शनि कुण्डली के विभिन्न भावों में किस प्रकार के फल दे सकता है. इस विषय का विश्लेषण करते है. </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>मकर लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Capricorn Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/580-saturn-sadesati-for-capricorn-ascendant.aspx</link>
      <description>भाव व राशियों के तरह ग्रहों की भी विशेषताएं होती है. जिनसे ग्रह की शुभता व अशुभता का निर्धारण होता है. पर ग्रह भाव, राशियों में अपनी स्थिति के अनुसार अपने फलों को बदल लेते है. विशेष रुप से लग्नेश व महादशा स्वामी से ग्रह के संबन्ध फलों को प्रभावित करते है. मकर लग्न की कुण्डली के 12 भावों में शनि इस प्रकार के फल दे सकता है. आईये देखे.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>धनु लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Sagittarius Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/579-saturn-sadesati-for-sagittarius-ascendant.aspx</link>
      <description>पराशर ऋषि के अनुसार ग्रह अपनी स्थिति, युति व दृष्टि के अनुसार फल देते है. इसके अतिरिक्त शुभ ग्रह केन्द्र भावों में व अशुभ ग्रह केन्द्र , त्रिकोण के अलावा अन्य भावों में शुभ फल देने वाले कहे गये है. कारक ग्रह अपने भाव को देखे तो भाव को बल प्राप्त होता है. भाव को भावेश देखे तब भी भाव बली होता है. ग्रह से शुभ ग्रह दृष्टि संबन्ध बनाये तो ग्रह की अशुभता में कमी व शुभता में वृ्द्धि होती है. इसके विपरीत ग्रह से कोई भी अशुभ ग्रह संबन्ध बनाये तो फल इसके विपरीत प्राप्त होते है. </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>वृ्श्चिक लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Scorpio Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/578-saturn-sadesatis-for-scorpio-ascendant.aspx</link>
      <description>जन्म कुण्डली में शनि जिस भाव व जिस राशि में स्थित होता है. उसके अनुसार व्यक्ति को शनि के फल मिलने की संभावनाएं बनती है. शनि से मिलने वाले फलों को समझने के लियेस सबसे पहले जन्म कुण्डली में शनि के लग्नेश से संबन्धों को देखा जाता है. उसके पश्चात शनि किस भाव में स्थित है यह देखा जाता है. तथा अन्त में भाव की राशि, अन्य ग्रहों से शनि के संबन्ध का विचार किया जाता है. </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>तुला लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Virgo Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/576-saturn-sadesati-for-libra-ascendant.aspx</link>
      <description>किसी भी ग्रह के फलों का विचार करने के लिये ग्रह की स्थिति, युति व दृष्टि का विश्लेषण किया जाता है. ज्योतिष शास्त्र में सभी नौ ग्रहों के अपने गुण व विशेषताएं है. इसलिये ग्रह अपने गुण व विशेषताओं से भी प्रभावित होते है. जैसे:- गुरु को धन, ज्ञान व संतान का कारक ग्रह कहा जाता है. गुरु प्रभावित दशा अवधि में व्यक्ति को इन सभी कारक वस्तुओं की प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. इसी प्रकार अन्य ग्रह भी अपने कारकतत्वों के अनुरुप फल देते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>कन्या लग्न के लिये शनि साढे साती (The Result of Saturn in Various Houses for Virgo Ascendant)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/575-saturn-sadesati-for-virgo-ascendant.aspx</link>
      <description>जब कुण्डली में किसी एक भाव, राशि में स्थित ग्रह से मिलने वाले फलों का विचार किया जाता है. तो सर्वप्रथम यह देखा जाता है कि ग्रह कुण्डली के किस भाव में स्थित है, उस भाव में कौन सी राशि है, तथा उस राशि स्वामी से ग्रह के किस प्रकार के संबन्ध है. इसके अतिरिक्त इस ग्रह से अन्य आठ ग्रहों से किसी भी ग्रह का कोई संबन्ध बन रहा है या नहीं. इन सभी बातों का विचार करने के बाद ही यह निर्धारित किया जाता है कि ग्रह से किस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते है.  </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>सिंह लग्न के लिये शनि साढे साती (The Result of Saturn in Various Houses for Leo Ascendant)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/574-saturn-trasit-for-leo-ascendant.aspx</link>
      <description>इसी प्रकार सभी ग्रह अपनी स्वराशि, मित्र राशि, उच्च राशि में हों तो शुभफल देने की क्षमता रखते है. सम राशि में होने पर मिले- जुले फल देते है. या वे शत्रु राशि, राशिअंत, नीच राशि में हों, तो शुभ फल देने में असमर्थ होते है. अन्य अनेक कारणों से ग्रहों से मिलने वाले फल प्रभावित होते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>कर्क लग्न के लिये शनि साढेसाती (Saturn's Sadesati For Cancer Ascendant)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/573-shani-sadesati-for-cancer-ascendan.aspx</link>
      <description>कर्क लग्न के लिये शनि सप्तमेश व अष्टमेश भाव के स्वामी होते है. इस लग्न के लिये शनि कुण्डली के बारह भावों में स्थित होकर किस प्रकार के फल दे सकते है. आईये यह जानने का प्रयास करते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>वृषभ लग्न के लिये शनि साढेसाती  (Results of Saturn's Sadesti for different houses for Taurus Ascendant)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/571-saturn-sadesti-for-taurus-ascendant.aspx</link>
      <description>शनि के विषय में यह कहा जाता है कि वे जिस भाव में स्थित होते है. तथा जिन भावों से दृष्टि संबन्ध बनाते है. उनके फल देर से ही सही पर अवश्य प्राप्त होते है. शनि से मिलने वाले फल भी राशियों के कारकतत्वों से प्रभावित होते है. इसलिये जन्म कुण्डली से शनि के फलों का विचार करते समय इस ग्रह से संबन्ध बनाने वाले अन्य सभी ग्रहों की स्थिति का भी विश्लेषण करना चाहिए.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>मेष लग्न के लिये शनि  -  Saturn for Aries Ascendant</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/570-saturn-for-aries-ascendant.aspx</link>
      <description>कुल नौ ग्रहों में से शनि भी एक ग्रह है. शनि एक मन्द गति ग्रह है. इसलिये शनि से मिलने वाले फल लम्बी अवधि तक प्राप्त होते है. शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहते है. पर इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे ढाई वर्ष तक व्यक्ति को एक से ही फल प्राप्त होते है. या फिर शनि प्रभावित व्यक्ति के जीवन में एक सी ही घटनाएं घटित होती है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>सभी राशियों के लिये शनि साढेसाती उपाय (Remedies for Saturn Sadesati for All Rashis)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/568-shani-sade-sati-remedies-remedies.aspx</link>
      <description>शनि साढेसाती एक ओर जहां व्यक्ति को उसके कार्यक्षेत्र में कार्यो मे सफलता दिला, उन्नती व सफलतता के नये मार्ग खोलती है. वहीं इस अवधि में व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन जिसमें परिवारिक जीवन व दांम्पत्य जीवन दोनों में परेशानियां भी दे सकती है. शनि साढेसाती में व्यक्ति के धैर्य व संघर्ष क्षमता में वृ्द्धि होती है. उसकी सहनशीलता भी पहले की तुलना में बढ जाती है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>सर्पाकार विवाह नाडी चक्र  (Sarpakar Vivah Nadi Chakra)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/567-sarpakar-vivah-nadi-chakra.aspx</link>
      <description>विवाह करने से पूर्व वर-वधू की कुण्डलियों का अनेक प्रकार से मिलान किया जाता है. जिसमें अष्टकूट मिलान, ग्रह मिलान, कुण्डलियों के शुभ व अशुभ योग, मांगलिक योग व आधुनिक काल में रक्त मिलान भी इन मिलानों में सम्मिलित हो गया है. विवाह करने वाले वर-वधू दोनों का जीवन पूर्णता: सुखमय बना रहे, इसके लिये दोनों ही कुण्डलियों का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाता है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>शनि स्तोत्र पाठ : शनि साढेसाती उपाय  - Shani Stotra Path and Shani Stotratam</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/562-shani-stotra-path-and-shani-stotratam.aspx</link>
      <description>शनि साढेसाति के कष्टों में कमी करने के लिये शनि से संम्बन्धित अनेक उपाय किये जा सकते है. जिनमें शनि स्तोत्र पाठ व शनि स्तोत्रम को विशेष महत्व दिया जाता है. शनि के शुभ फल पाने के लिये इस पाठ का जाप नियमित रुप से प्रतिदिन (रविवार को छोडकर) करना लाभकारी रहता है. </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>शनि के पाया के फल  (What to Expect From Saturn's Paya)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/560-shani-paya-and-effects-of-shani-paya.aspx</link>
      <description>किसी भी व्यक्ति की जन्म राशि से शनि जिस भी भाव में गोचर कर रहा होता है. उसके अनुसार शनि के पाया अर्थात पाद फल विचार किया जाता है. व्यक्ति के जन्म कुण्डली को आधार बनाकर शनि पाया के फलों का अध्ययन किया जाता है. निम्न रुप से जन्म राशि के अनुसार शनि पाया की शुभता या अशुभता का निर्धारण किया जाता है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>विवाह समय के योग (Some Combinations To Predict The Time of Your Marriage Through Vedic Astrology) </title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/556-combinations-to-predict-time-of-marriage.aspx</link>
      <description>व्यक्ति चाहे तो किसी अच्छे ज्योतिषी से अपनी कुण्डली दिखवाकर जान सकता है कि शादी कब होगी. कुण्डली में ग्रहों के अच्छे योग होने पर जल्दी विवाह की उम्मीद रहती है जबकि विवाह से सम्बन्धित भाव एवं ग्रह पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर शादी देर से हो सकती है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>गजकेसरी योग फलादेश को प्रभावित करने वाले तत्व (What are the combinations that affect Gaja Kesari Yoga)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/553-combinations-that-affect-gajakesari-yoga.aspx</link>
      <description>गुरु सभी ग्रहों में सबसे शुभ ग्रह है. इन्हें शुभता, धन, व सम्मान का कारक ग्रह कहा जाता है. इसी प्रकार चन्द्र को भी धन वृ्द्धि का ग्रह कहा जाता है. दोनों के संयोग से बनने वाले गजकेसरी योग (Gaja Kesari Yoga) से व्यक्ति को अथाह धन प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. परन्तु गजकेसरी योग (Gaja Kesari Yoga) से मिलने वाले फल सदैव सभी के लिये एक समान नहीं होते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>चर, स्थिर व द्विस्वभाव राशियों में गजकेसरी योग (Placement of Gaja Kesari Yoga in Moveable, Fixed and Dual Signs)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/550-gajkesari-yoga-moveable-fixed-and-dual-signs.aspx</link>
      <description>गजकेसरी योग को धन योगों की श्रेणी में रखा जाता है. इस योग का निर्माण गुरु से चन्द्र के केन्द्र में होने पर होता है. यह योग जब केन्द्र भावों में बने तो सबसे अधिक शुभ माना जाता है. गजकेसरी योग व्यक्ति को धन, सम्मान व उच्च पद देने वाला माना गया है. गजकेसरी योग से मिलने वाले फल भाव, ग्रह, दृष्टि व ग्रहयुति के साथ साथ राशियों की विशेषताओं से भी प्रभावित होते है. गजकेसरी योग के फल चर, स्थिर व द्विस्वभाव राशियों में किस प्रकार के हो सकते है. आईये यह जानने का प्रयास करते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>राशियों में गजकेसरी योग किस प्रकार के फल देता है? (What is the result of Gaja Kesari Yoga in different Moon Signs)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/547-gaja-kesari-yoga-in-different-moon-signs.aspx</link>
      <description>गजकेसरी योग (Gaja Kesari Yoga) से मिलने वाले फल भी राशियों के गुणतत्वों से प्रभावित होते है. अलग-अलग राशियों के व्यक्तियों के लिये गजकेसरी योग अलग अलग फल देता है. विभिन्न राशियों में गजकेसरी योग (Gaja Kesari Yoga) से किस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
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      <title>गजकेसरी योग में किस प्रकार के फल प्राप्त होते है? (What are the results of the Gaja Kesari Yoga)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/544-gaja-kesari-yoga-effects.aspx</link>
      <description>जिस प्रकार अन्य प्रसिद्ध योग सभी के लिये एक समान फल नहीं देते है. उसी प्रकार एक व्यक्ति को गजकेसरी योग धनवान व प्रसिद्धि देता है तो दूसरे को इसके फल सामान्य से भी कम प्राप्त होते है. योग के फल, भाव, ग्रहों, राशियों व इस योग में युक्त गुरु व चन्द्र कि स्थिति  से प्रभावित होते है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>गजकेसरी योग कैसे बनता है?  How is Gaja Kesari Yoga Formed</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/541-how-gaja-kesari-yoga-forms.aspx</link>
      <description>वैदिक ज्योतिष में शुभ योगों में गजकेसरी योग (Gaja Kesari Yoga) को विशेष रुप से शुभ माना जाता है. यह योग गुरु से केन्द्र अर्थात लग्न, चतुर्थ, सप्तम व दशम भाव में चन्द्र हो तो 'गजकेसरी योग' बनता है. गुरु जो धन, ज्ञान, संमृ्द्धि, सौभाग्य, संतान के कारक ग्रह है वहीं चन्द्र मन, गतिशिलता, तरलता, मनोबल, शीतलता, सुख-शान्ति के ग्रह है.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>पितृ दोष कारण और निवारण - Pitru Dosha, How it forms and Pitra Dosha Remedies</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/536-pitra-dosha-remedies.aspx</link>
      <description>नवम पर जब सूर्य और राहू की युति हो रही हो तो यह माना जाता है कि पितृ दोष योग बन रहा है . शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते है, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते है .
व्यक्ति की कुण्डली में एक ऎसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है, इस दोष को पितृ दोष के नाम से जाना जाता है .</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>सूर्य चक्र से भाग्य व आयु निकालना  (Evaluation of Fortune and Longevity according to Sun Chakra)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/425-fortune-and-longevity-and-sun-cha.aspx</link>
      <description>तथा ऎसे व्यक्ति के मन में अपनी आयु को लेकर किसी प्रकार की कोई चिन्ता न रहे इसके लिये इस विधि से भी फल विचार कर लेना चाहिए. जन्म कुण्डली तथा सूर्य चक्र (Sun Chakra) जब दोनों ही विधियों से इस प्रकार के निष्कर्ष आ रहे हों तो सम्भावनाओं को निश्चित समझना चाहिए. अन्यथा इस विषय को लेकर मन में भ्रम का भाव नहीं रखना चाहिए.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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      <title>कृष्णमूर्ति पद्धति और एकादश भाव – KP Astrology and Eleventh House</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/424-kp-astrology-and-eleventh-house.aspx</link>
      <description>जीवन के आधारभूत तत्वों में से आय और व्यय महत्वपूर्ण होता है. हम सभी यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि हमारी आमदनी कैसी होगी तथा संचय की स्थिति क्या होगी. इन सभी बातों की जानकारी क्रमश: ग्यारहवें और बारहवें घर से मिलती है. ग्यारहवां भाव आय का घर माना जाता है तो बारहवां व्यय का। इन दोनों भावों के विषय में कृष्णमूर्ति पद्धति क्या कहती है आईये इसे दखें.</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
    <item>
      <title>नीच भंग राज योग (Neech Bhang Rajyog or Debilitated RajYoga)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/423-neech-bhang-rajyog.aspx</link>
      <description>ग्रह अगर नीच राशि में बैठा हो या शत्रु भाव में तो आम धारणा यह होती है कि जब उस ग्रह की दशा आएगी तब वह जिस घर में बैठा है उस घर से सम्बन्धित विषयों में नीच का फल देगा. लेकिन इस धारणा से अगल एक मान्यता यह है कि नीच में बैठा ग्रह भी कुछ स्थितियों में</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
    <item>
      <title>स्वास्थ्य का हाल जानिए जैमिनी ज्योतिष से (Your Health and Jaimini Astrology)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/422-health-and-jaimini-astrolog.aspx</link>
      <description>हमारे शरीर के सभी अंगों पर किसी न किसी राशि का स्वामित्व रहता है. स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव का कारण भी राशियों व ग्रहों की युति और स्थिति पर निर्भर होता है ऐसा ज्योतिषशास्त्र का मत है. इस विषय में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि जिस व्यक्ति की कुण्डली में नवम भाव का स्वामी आठवें घर में विराजमान होता है वह व्यक्त राशि आपके शरीर के विभिन्न अंगों पर राज करती है. </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
    <item>
      <title>गुरू के घर परिवर्तन का धनु राशि पर प्रभाव (Impact of Jupiter’s Transit Into Aquarius on Sagittarius Sign)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/421-aquarius-on-sagittarius-sign.aspx</link>
      <description>आपकी जन्म राशि का स्वामी गुरू 20 दिसम्बर 2009 को शनि की राशि मकर से निकलकर शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रवेश करने जा रहा है. इस राशि में गुरू 1 मई 2010 तक रहेगा. इस दौरान धनु राशि पर गुरू की रजत स्थिति रहेगी और यह मूल नक्षत्र एवं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
    <item>
      <title>कर्क राशि पर गुरू के घर परिवर्तन का प्रभाव (Impact of Jupiter’s Transit Into Aquarius on Cancer Sign)</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/420-aquarius-on-cancer-sign.aspx</link>
      <description>20 दिसम्बर को गुरू शनि ग्रह की राशि कुम्भ में प्रवेश कर रहा है. गुरू के घर परिवर्तन को ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सभी ग्रहों का गुरू होने के साथ ही साथ शुभ ग्रह भी है. इनके घर परिवर्तन से विवाह, संतान, ज्ञान, विद्या,</description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
    <item>
      <title>सीमांतोन्नयन संस्कार  - Simantonnayana Sanskar</title>
      <link>http://astrobix.com/hindi/408-simantonayana-sanskar.aspx</link>
      <description>गर्भाधारण से लेकर प्रसव की तिथि तक पुंसवन संस्कार के बाद किया जाने वाला संस्कार  सीमांतोन्नयन संस्कार  (Simantonnayana Sanskar) के नाम से जाना जाता है. यह संस्कार गर्भाधान के छठे माह से लेकर आठवें माह के मध्य की अवधि में संपन्न किया जाता है.   </description>
      <author>http://astrobix.com</author>
    </item>
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