मास्टर नंबर को अंक ज्योतिष में महत्वपूर्ण नंबर माने गए हैं. आधुनिक अंक शास्त्री इन मास्टर नंबर के महत्व को बखूबी परिलक्षित कर पाए हैं. इन मास्टर नंबर को अंक शात्र में सर्वोत्तम अंक कहा गया है.
सूर्य को सभी बारह राशियों से गुजरने में एक वर्ष अर्थात लगभग 365 दिन का समय लगता है. अंक विद्या में सूर्य की स्थिति के आधार पर हर माह को एक अंक प्रदान किया गया है. इन महीनों की अवधि, सामान्य अवधि से
अंक शास्त्र में सूर्य तथा चन्द्रमा दो ऎसे ग्रह हैं जिन्हें दो अंक प्राप्त हैं. सूर्य तथा यूरेनस का आपस में परस्पर संबंध माना गया है, इसलिए सूर्य को 1 तथा 4 दो अंक प्राप्त है. वास्तविकता में अंक 1
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, आज भी अंकशास्त्री नामांक
नामांक ज्योतिष एक महत्वपूर्ण विद्या है, जिसके माध्यम से व्यक्ति के विषय एवं उसके भविष्य को जानने का प्रयास किया जाता है. नामांक ज्योतिष में अंकों के माध्यम द्वारा गणित के नियमों का व्यवहारिक उपयोग
जीवन में नाम का बहुत महत्व होता है नाम से ही हमारी पहचान होती है. नाम का महत्व खुद ब खुद दृष्टिगत होता है, तथा नाम रखने की विधि को संस्कार कर्म में रखा जाता है और इसमें जातक के जन्म नक्षत्र पर आधारित
नामांक जीवन में बदलाव ला सकता हैं और हमारे जीवन को आशावादी दिशा प्रदान कर सकता है. नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति,
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है. आज भी अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी प्राचीन तरीके से करते हैं. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर की जाती रही है. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है, इनमें से किसी ने नौ अंक
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है. अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी तरीके से करते हैं. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस
नामांक को सौभाग्य अंक भी कहते हैं. आज लगभग सभी अंकशास्त्री नामांक की गणना इसी प्राचीन तरीके से करते हैं. नामांक कि गणना के लिए कीरो पद्धति, सेफेरियल पद्धति तथा पाइथागोरस पद्धति का उपयोग किया जाता है,
नामांक की गणना अंग्रेजी के अक्षरों को दिये गये अंकों के आधार पर ही की जाती रही है. व्यक्ति के नाम के अक्षरों के कुल योग से बनने वाले अंक को नामांक कहा जाता है. नामांक गणना के लिए कीरो पद्धति,
अंकशास्त्र में मूलांक (जन्मांक) और भाग्यांक ज्ञात करना बेहद आसान होता है और अधिकतर सभी को मालूम भी होता है कि किस प्रकार इसे प्राप्त कर सकते हैं. लेकिन नामांक को निकाल पाना सभी को नही आता और यह थोड़ा
भाग्यांक, संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का योग(जोड़) करना होता है और जो योग प्राप्त होता है वही भाग्यांक कहलाता है जैसे किसी
भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है. भाग्याँक को संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का
भाग्यांक जानने के लिये, भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का योग(जोड़) करना होता है, तथा जो योग प्राप्त होता है वही भाग्यांक कहलाता है, जैसे किसी व्यक्ति का जन्म 6 अप्रैल 1959 है तो उस
भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है. भाग्याँक को संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का योग
भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है. भाग्याँक को संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का
भाग्याँक को संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का
भाग्याँक को संयुक्त रूप से अंकों को जोड़ कर प्राप्त किया जाता है. भाग्यांक जानने के लिये, जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष की आवश्यकता होती है. भाग्यांक में जन्म तिथि, जन्म माह तथा जन्म वर्ष का